वज्रपात से मौत !

वज्रपात से मौत !

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वज्रपात से दो युवकों की मौत
चार घायल
गिरिडीह। जिले के तिसरी प्रखंड अंतर्गत चंदौरी गांव में बुधवार शाम को अचानक तेज आंधी और भारी बारिश के साथ हुई वज्रपात में दो युवकों की मौत हो गई, जबकि चार अन्य घायल हो गए। 

मृतकों की पहचान चंदौरी निवासी स्व. प्रीतम तुरी के 24 वर्षीय पुत्र नूनमुनि कुमार और स्व. तनेश्वर उर्फ ठाकुर तुरी के 12 वर्षीय पुत्र अमन कुमार के रूप में हुई है। घायलों में राजू तुरी (स्व. योधी तुरी का पुत्र), चंदन कुमार (खूबलाल रविदास का पुत्र), दामोदर कुमार (प्रकाश रविदास का पुत्र) और आफ़ताब अंसारी शामिल हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, सभी युवक खेलने गए थे। अचानक मौसम बिगड़ने और तेज आंधी-बारिश शुरू होने पर वे चंदौरी नदी के तट पर स्थित एक पुराने जर्जर भवन में शरण लेने चले गए। ठीक उसी समय आसमान से बरसा वज्रपात उनके लिए घातक साबित हुआ। दो युवकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चार गंभीर रूप से घायल हो गए।

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय मुखिया प्रतिनिधि राजकुमार दयाल और ग्रामीणों ने घायलों को तुरंत चंदौरी के एक निजी क्लिनिक पहुंचाया, जहां उनका इलाज चल रहा है। तिसरी पुलिस भी घटनास्थल पर पहुंचकर जांच में जुट गई है।

तिसरी अंचल अधिकारी अखिलेश प्रसाद ने बताया कि मृतकों के परिवारों को आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से उचित मुआवजा दिलाया जाएगा। उन्होंने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना भी की।

यह घटना स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल पैदा कर गई है। मौसम विभाग ने क्षेत्र में अगले कुछ दिनों तक गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना जताई है, जिसके चलते लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

वज्रपात (आकाशीय बिजली) से बचाव के लिए कुछ ज़रूरी बातें

वज्रपात से बचाव संभव है, अगर समय रहते सावधानी बरती जाए। NDMA और IMD के अनुसार सबसे महत्वपूर्ण नियम "30-30 Rule" है_ 
जब बिजली चमके, तो 30 सेकंड के अंदर गरज सुनाई दे तो तुरंत सुरक्षित जगह पर चले जाएं। गरज की आखिरी आवाज सुनने के 30 मिनट बाद तक सुरक्षित स्थान पर रहें।

बाहर होने पर (Outdoor) क्या करें_
तुरंत सुरक्षित आश्रय लें — पक्की इमारत (मकान) या पूरी तरह बंद हार्ड-टॉप वाली गाड़ी (कार) में बैठ जाएं। खिड़कियां और दरवाजे बंद रखें।

इन जगहों से बचें_
एकाकी या ऊंचे पेड़ के नीचे खड़े न हों (सबसे आम खतरा)।
खुले मैदान, पहाड़ी, टीला या ऊंची जगह।
पानी के शरीर (तालाब, नदी, पोखर) के पास।
धातु की शेड, ट्रैक्टर, रिक्शा, मोटरसाइकिल या खुले वाहन से बचें।
बिजली के खंभे, तार या फेंसिंग के पास।

अगर कोई आश्रय न मिले तो_
नीचे बैठ जाएं (crouch position), पैर जोड़कर, सिर घुटनों के बीच, हाथ घुटनों पर रखें।
जितना हो सके जमीन से कम संपर्क रखें। जमीन पर लेटें नहीं।

घर या इमारत के अंदर होने पर_
खिड़कियां, दरवाजे और बालकनी से दूर रहें।
इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल न करें_
  - चार्जिंग मोबाइल, लैपटॉप, टीवी, कंप्यूटर आदि को प्लग से निकाल दें।
  - लैंडलाइन (तार वाले) फोन का इस्तेमाल न करें।
- नहाने, बर्तन धोने या कपड़े धोने से बचें (पानी की पाइप से बिजली गुजर सकती है)।
- प्लंबिंग (नल, शावर, सिंक) और दीवारों में लगे धातु के हिस्सों को न छुएं।
- कंक्रीट की दीवार या फर्श से पीठ न लगाएं।

अन्य जरूरी सावधानियां_
मौसम पूर्वानुमान देखें। "Damini" ऐप (IMD का) या मौसम ऐप से वज्रपात अलर्ट लें।
बारिश-आंधी के समय खेतों में काम, खेल या यात्रा टाल दें।
अगर गाड़ी में हैं तो वहीं रुकें, खिड़कियां बंद रखें। धातु की गाड़ी अपेक्षाकृत सुरक्षित होती है (रबर टायर सुरक्षा नहीं देते)।
बच्चों और पशुओं को घर के अंदर रखें।

अगर किसी पर वज्रपात हो जाए तो_
तुरंत 108 या नजदीकी अस्पताल/पुलिस को फोन करें।
पीड़ित को छूने में डरें नहीं (वे बिजली का संचार नहीं करते)।
अगर सांस या दिल की धड़कन बंद हो तो CPR शुरू करें और मदद आने तक जारी रखें।
कई बार पीड़ित को दोबारा बिजली नहीं गिरती, इसलिए तुरंत मदद दें।

झारखंड-बिहार जैसे क्षेत्रों में मानसून के दौरान वज्रपात की घटनाएं ज्यादा होती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पेड़ के नीचे शरण लेना आम कारण है, इसलिए जागरूकता बहुत जरूरी है।

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