चुनौतियां बरकरार, लेकिन तैयारी पहले से बेहतर
नई दिल्ली। इजरायल-ईरान संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ हरमुज में व्यवधान के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल आयातक है, इस संकट से प्रभावित तो हुआ है, लेकिन रणनीतिक विविधीकरण, भंडारण और घरेलू प्रयासों के कारण स्थिति 2003 के गल्फ युद्ध या 2019-20 की पूर्व संकटों की तुलना में कुछ नियंत्रण में दिख रही है।
भारत अपनी लगभग 85-90% कच्चे तेल की जरूरत आयात से पूरी करता है, जिसमें पहले मध्य पूर्व (खाड़ी देशों) की हिस्सेदारी करीब 45-50% हुआ करती थी। लेकिन हरमुज स्ट्रेट के बंद/प्रभावित होने से मार्च-अप्रैल 2026 में आयात में 13% की कमी आई, लेकिन रूस अब भारत का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन गया है। सऊदी अरब, यूएई, अफ्रीका, वेनेजुएला और ब्राजील से आयात बढ़ाए गए। अप्रैल में मध्य पूर्व की हिस्सेदारी घटकर रिकॉर्ड निचले स्तर (लगभग 26%) पर पहुंच गई।
सरकार ने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) का सहारा लिया, जो करीब 25-30 दिनों की मांग के बराबर कच्चे तेल और पेट्रोल-डीजल कवर करता है। एलपीजी के लिए भी घरेलू उत्पादन बढ़ाने और वैकल्पिक स्रोतों (अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया) से आयात का प्रयास किया गया। ईरान से सीमित आयात भी दोबारा शुरू किया गया।
तेल की कीमतों में उछाल (मार्च में ब्रेंट क्रूड $80 से ऊपर चढ़कर $100+ के आसपास) के चलते भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में करीब 3% की बढ़ोतरी हुई। एलपीजी (रसोई गैस) पर सब्सिडी का बोझ बढ़ा, जिससे वित्तीय दबाव पड़ा। कुछ क्षेत्रों में स्टील, पेट्रोकेमिकल और उर्वरक उत्पादन प्रभावित हुआ। हालांकि, सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती और अन्य उपायों से उपभोक्ताओं पर बोझ सीमित रखा।
पिछले संकटों से बेहतर स्थिति?
जानकारों के अनुसार, इस बार भारत की तैयारी मजबूत दिखी। जैसे कि_
- आयात स्रोतों का विविधीकरण (27 से बढ़कर 41 देश) हुआ।
- रूस जैसे सस्ते विकल्पों का भरोसा मिला।
- मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार।
- नवीकरणीय ऊर्जा सौर, पवन और बैटरी स्टोरेज क्षमता तेजी से बढ़ाई जा रही है।
पिछले संकटों में निर्भरता ज्यादा केंद्रित थी और भंडार कम थे। इस बार शॉर्ट-टर्म शॉर्टेज से बचा जा सका, हालांकि लंबे समय तक संकट बने रहने पर चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
पेट्रोलियम मंत्रालय ने आश्वासन दिया है कि कच्चे तेल की आपूर्ति सुरक्षित है और रिफाइनरियां उच्च क्षमता पर चल रही हैं। लंबे समय के लिए ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नवीकरणीय स्रोतों को बढ़ावा और घरेलू उत्पादन पर फोकस जारी है।
विश्लेषकों का कहना है कि यह संकट भारत के लिए एक सबक है_
आयात पर पूर्ण निर्भरता को कम करने और स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों को अपनाने का।
फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन मध्य पूर्व में शांति बहाल होने तक सतर्कता बरती जा रही है।
