जनगणना 2027 के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू

जनगणना 2027 के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू

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जनगणना 2027 के लिए तीन दिवसीय प्रखंड स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू
सारठ (देवघर)। प्रखंड मुख्यालय सभागार में भारत की जनगणना 2027 के अंतर्गत तीन दिवसीय प्रखंड स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। 

प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ 27 अप्रैल 2026 को हुआ, जो 29 अप्रैल तक चलेगा। प्रशिक्षण के दौरान ट्रेनर डॉ. सुजाता सिन्हा एवं रजनी रंजन ने प्रतिभागियों को जनगणना कार्य से संबंधित सभी तकनीकी, सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी। 

ट्रेनरों ने जनगणना की संपूर्ण प्रक्रिया, प्रशासनिक व्यवस्था, डिजिटल डेटा संग्रह, हाउस लिस्टिंग, मोबाइल ऐप के उपयोग तथा अन्य महत्वपूर्ण तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की और सभी संदेहों का समाधान किया।

प्रशिक्षण ले रहे प्रतिभागियों ने बताया कि भीषण गर्मी के बावजूद प्रखंड सभागार में बिजली के पंखे, पेयजल और अन्य बुनियादी व्यवस्थाएं काफी लचर रहीं, जिसके कारण उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

“जनगणना 2027 भारत की सबसे महत्वपूर्ण जनसांख्यिकीय अभ्यास है। हम सभी प्रतिभागियों को पूरी तरह तैयार कर रहे हैं ताकि वे मैदान में जाकर सटीक और गुणवत्तापूर्ण काम कर सकें।”
_डाॅ. सुजाता सिन्हा, ट्रेनर

रजनी रंजन ने भी प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि तकनीकी प्रशिक्षण के साथ-साथ व्यावहारिक चुनौतियों से निपटने की क्षमता भी विकसित की जा रही है।

प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण की उपयोगिता को सराहा, लेकिन व्यवस्था संबंधी समस्याओं पर ध्यान देने की मांग की।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम जनगणना 2027 की पहली चरण (हाउस लिस्टिंग एवं हाउसिंग सेंसस) की तैयारियों का हिस्सा है, जो पूरे देश में अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच विभिन्न चरणों में आयोजित होने वाला है।

जनगणना 2027 की पूरी प्रक्रिया जानें
भारत की 16वीं जनगणना (Census 2027) स्वतंत्र भारत की सबसे महत्वपूर्ण और पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना है। यह दो चरणों में आयोजित की जा रही है। यह 2011 के बाद होने वाली पहली दशकीय जनगणना है और इसमें जाति जनगणना (Caste Enumeration) भी शामिल की गई है।

पहला चरण_ हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस (House Listing & Housing Census - HLO)

समयावधि- 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 तक (कुल 6 महीने)

प्रत्येक राज्य/केंद्रशासित प्रदेश में यह कार्य 30 दिनों की अवधि में पूरा किया जाएगा (राज्यों के अनुसार अलग-अलग तारीखें)।

स्व-जनगणना (Self-Enumeration)- हाउस लिस्टिंग शुरू होने से ठीक 15 दिन पहले नागरिक खुद ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी भर सकते हैं। यह पहली बार शुरू किया गया विकल्प है, जिससे जन भागीदारी बढ़ेगी।

क्या जानकारी ली जाती है ?
  - घरों की सूची तैयार करना (House Listing)
  - मकान की स्थिति, निर्माण सामग्री, कमरों की संख्या
  - बुनियादी सुविधाएं: पीने का पानी, बिजली, शौचालय, ईंधन, रसोई आदि
  - घरेलू संपत्तियां: टीवी, फ्रिज, मोबाइल, वाहन, कंप्यूटर आदि
  - कुल 33 प्रश्न पूछे जाते हैं (HLO शेड्यूल में)।

यह चरण मुख्य रूप से आवास और घरेलू सुविधाओं पर केंद्रित है। गणक (Enumerators) मोबाइल ऐप (HLO App) के जरिए डेटा रिकॉर्ड करेंगे।

दूसरा चरण_ जनसंख्या गणना (Population Enumeration - PE)
- समयावधि- फरवरी 2027 (अधिकांश राज्यों में)।
संदर्भ तिथि (Reference Date)-
  - अधिकांश भारत के लिए — 1 मार्च 2027
  - हिमाच्छादित/दूरस्थ क्षेत्रों (जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड) के लिए — 1 अक्टूबर 2026

क्या जानकारी ली जाती है ?
  - व्यक्तिगत विवरण: नाम, आयु, लिंग, वैवाहिक स्थिति, शिक्षा, व्यवसाय, प्रवास आदि
  - सामाजिक-आर्थिक स्थिति
  - विकलांगता
  - जाति जनगणना (पहली बार स्वतंत्र भारत में पूर्ण रूप से)
  - प्रजनन दर, परिवार नियोजन आदि

नई बातें क्या हैं ?
- पहली डिजिटल जनगणना: पेपर के बजाय मोबाइल ऐप और ऑनलाइन सिस्टम का उपयोग।
- सेल्फ एनुमरेशन: नागरिक खुद डेटा भर सकेंगे (पोर्टल के माध्यम से)।
- जाति गणना: 1931 के बाद पहली बार पूर्ण जाति जनगणना।
- तीन करोड़ से अधिक गणक और पर्यवेक्षक तैनात किए जाएंगे।
- डेटा संग्रह के बाद तेज प्रसंस्करण, जिससे परिणाम उसी वर्ष उपलब्ध होने की उम्मीद है।

क्यों ज़रूरी है ?
जनगणना 2027 के आंकड़े नीति निर्माण, संसाधन वितरण, आरक्षण, चुनाव क्षेत्र निर्धारण, विकास योजनाओं आदि के लिए आधार बनेंगे। यह देश की जनसांख्यिकी, सामाजिक-आर्थिक स्थिति और आवासीय सुविधाओं की सटीक तस्वीर पेश करेगा।


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