बालखनजो पहाड़ के पास रेल हादसा
गिरिडीह/कोडरमा। कोडरमा से मधुपुर जाने वाली ट्रेन की चपेट में आने से एक 29 वर्षीय युवक की मौके पर ही मौत हो गई। यह हादसा बालखनजो पहाड़ के समीप रेलवे पोल संख्या 99/5 और 99/6 के बीच हुआ।
मृतक की पहचान गुलाम मुस्तफा (29 वर्ष) के रूप में हुई है, जो मोहनपुर, थाना पचम्बा का निवासी था। वह सरफुद्दीन का पुत्र था।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, युवक रेल पटरी पर था, तभी तेज रफ्तार ट्रेन ने उसे अपनी चपेट में ले लिया। हादसे की तीव्रता इतनी अधिक थी कि युवक मौके पर ही अपनी जान गंवा बैठा।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंच गई और तुरंत जांच शुरू कर दी। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए गिरिडीह भेज दिया गया है। पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर हादसे के सटीक कारणों का पता लगा रही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि युवक जानबूझकर या अनजाने में पटरी पार करने की कोशिश कर रहा था।
रेलवे अधिकारियों ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया है। इस प्रकार के हादसों को रोकने के लिए रेलवे सुरक्षा उपायों पर भी सवाल उठने लगे हैं।
गिरिडीह में रेलवे सुरक्षा की समस्याएं_ एक गंभीर मसला
झारखंड के गिरिडीह जिले में रेलवे सुरक्षा लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। कोडरमा-मधुपुर, कोडरमा-गिरिडीह और गिरिडीह-मधुपुर रेल खंडों पर बार-बार हादसे हो रहे हैं, जिनमें ट्रेन की चपेट में आम लोगों की मौत, मालगाड़ियों का पटरी से उतरना और लेवल क्रॉसिंग पर खतरे प्रमुख हैं।
ट्रेन से टकराकर मौत के लगातार मामले
बालखनजो पहाड़ के पास (पोल 99/5-99/6) जैसे इलाकों में युवकों की ट्रेन की चपेट में मौत होना आम हो गया है। हाल के वर्षों में कोडरमा-गिरिडीह खंड पर कई युवक (जैसे गुलाम मुस्तफा, शंकर दास आदि) रेल पटरी पार करते समय या नशे में होने के कारण अपनी जान गंवा चुके हैं। फूलजोरी, हीरोडीह, रेम्बा स्टेशन के पास और झारखंडधाम हॉल्ट क्षेत्र में भी ऐसे हादसे बार-बार रिपोर्ट हुए हैं।
मालगाड़ियों का पटरी से उतरना (Derailment)
जुलाई 2025 में कोडरमा-कोवाड़ (सलैया) खंड पर एक भरी हुई मालगाड़ी के कई डिब्बे पटरी से उतर गए थे, जिससे रेल परिचालन बाधित हुआ। अखिल भारतीय गार्ड्स काउंसिल ने इस हादसे के बाद रेलवे सुरक्षा पर गंभीर चिंता जताई थी। ऐसे हादसे ट्रैक की स्थिति, रखरखाव और सिग्नलिंग सिस्टम की कमियों की ओर इशारा करते हैं।
अनमैनड और खतरनाक लेवल क्रॉसिंग
सरिया, नवाडीह और अन्य जगहों पर लेवल क्रॉसिंग पर बस, ट्रक और दोपहिया वाहनों के फंसने या टकराने के मामले सामने आए हैं। भारी यातायात और गेटमैन की कमी के कारण बड़े हादसे टलते-टलते बचते हैं।
रेलवे अंडरपास और इंफ्रास्ट्रक्चर की खराब स्थिति
पचम्बा रेलवे अंडरपास पिछले 10 वर्षों से गड्ढों और पानी भरने की समस्या से जूझ रहा है, जहां रोजाना छोटी-मोटी दुर्घटनाएं होती रहती हैं।
ट्रैक पर चलना और जागरूकता की कमी
ग्रामीण इलाकों में लोग रेल पटरी को शॉर्टकट के रूप में इस्तेमाल करते हैं। नशे में पटरी पार करना, छात्रों द्वारा पटरी पर दौड़ना और फाटक बंद होने पर भी जोखिम उठाना सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है।
क्या कहते हैं आंकड़े ?
झारखंड में रेलवे से जुड़ी दुर्घटनाओं में ट्रेन से टकराव या पटरी पर चलने वाले लोगों की मौत का आंकड़ा काफी ऊंचा है। पूरे देश में 2023 में रेलवे दुर्घटनाओं में 21,000 से ज्यादा मौतें हुईं, जिनमें ज्यादातर मामले ट्रैक पर लोगों के टकराव के थे। गिरिडीह-कोडरमा खंड पहाड़ी और घने इलाकों से गुजरता है, जहां दृश्यता कम होने और तेज रफ्तार ट्रेनों के कारण जोखिम और बढ़ जाता है।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि जांच चल रही है और ट्रैक रखरखाव, फेंसिंग, अंडरपास सुधार तथा जागरूकता अभियान पर काम हो रहा है। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि सुधार की रफ्तार बहुत धीमी है।
गिरिडीह जैसे क्षेत्रों में रेलवे सुरक्षा केवल रेलवे विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि स्थानीय समाज और प्रशासन की भी है। बार-बार हो रहे हादसों को रोकने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
