देर रात खुद मारे छापे
दर्जनों अवैध कोयला लोड ट्रकों को पकड़ा
पुलिस-प्रशासन और कोयला माफियाओं का गठजोड़ उजागर
विधायक ने दी चेतावनी
धनबाद/निरसा । निरसा विस क्षेत्र में अवैध कोयला कारोबार के खिलाफ निरसा विधायक अरूप चटर्जी ने रात के अंधेरे में खुद मोर्चा संभाला। उन्होंने प्रशासन को पहले ही अल्टीमेटम दे रखा था कि अवैध कोयला लोडिंग पर तुरंत रोक लगाई जाए, वरना वे नाकाबंदी आंदोलन शुरू कर देंगे। लेकिन जब प्रशासन ने उनकी चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया, तो विधायक जी अपनी टीम के साथ सीधे सड़क पर उतर आए।
देर रात बोर्डर से लेकर तमाम चौक-चौराहों पर विधायक की फौज तैनात हो गई। अरूप चटर्जी खुद अवैध कोयला लोडिंग अड्डों पर पहुंचे और एक-एक कर ट्रकों की तलाशी ली। कुछ ही घंटों के अंदर दर्जनों अवैध कोयला लोड ट्रक पकड़े गए, जिन्हें तुरंत पुलिस के हवाले कर दिया गया।
विधायक अरूप चटर्जी ने बताया,
“सारी हकीकत सामने आ गई है। बाहर से कई कोयला माफिया इस क्षेत्र में कोयला का काला बाजार चला रहे हैं। वार्निंग देने के बावजूद चोरों की हिमाकत देखिए कि वे अवैध कोयला लोड कर यूपी और बिहार की मंडियों में भेज रहे थे। किसी भी ट्रक में न तो कोई कागजात थे, न परमिट, न वैध दस्तावेज।”
पुलिस-प्रशासन और माफिया का गठजोड़!
विधायक ने साफ कहा कि अगर कोयला माफिया और जिला पुलिस-प्रशासन अभी भी नहीं सुधरे तो ऐसी छापेमारी वाली कार्यवाई लगातार जारी रहेगी। उन्होंने इस कार्रवाई को “पुलिस प्रशासन और कोयला माफियाओं के गठजोड़” को उजागर करने वाली बताते हुए प्रशासन से तुरंत कार्रवाई की मांग की।
यह छापेमारी इलाके में चर्चा का विषय बन गई है। स्थानीय लोग विधायक की इस सख्ती की सराहना कर रहे हैं और उम्मीद जता रहे हैं कि अवैध कोयला कारोबार पर अब लगाम लगेगी।
अवैध कोयला कारोबार (कोयला माफिया) का इतिहास_
झारखंड, खासकर धनबाद-निरसा-झरिया का इलाका, भारत का कोयला राजधानी कहा जाता है। यहां अवैध कोयला कारोबार दशकों से एक अवैध और समानांतर पर संगठित माफियाओं का साम्राज्य बना हुआ है, जिसे आम जुबानी कोयला माफिया कहा जाता है। यह न सिर्फ सरकारी राजस्व को अरबों का नुकसान पहुंचाता है, बल्कि इन इलाकों में हिंसक घटनाएं, गुंडागर्दी, खदान हादसे और पर्यावरणीय तबाही का सबसे बड़ा कारण भी है। और यह सब मुमकिन होता रहा है_पुलिस-प्रशासन-राजनीति के अटूट गठजोड़ से !
शुरूआती दौर (1960-1970 का दशक)_
- कोयला खनन उस दौर में निजी कंपनियों के हाथों में था।
- बेहद ही कम मजदूरी, असुरक्षा और गरीबी के कारण छोटे स्तर पर अवैध खनन शुरू हुआ।
- गरीब परिवार और बेरोजगार मजदूर कोयला चुराकर बेचने लगे।
- धीरे-धीरे इन अवैध खनन और कारोबार में ट्रांसपोर्टर, ठेकेदार, यूनियन लीडर और स्थानीय गुंडे भी शामिल होने लग गए।
राष्ट्रीयकरण और माफिया का उदय (1971-1973)_
- यह वह दौर था जब इंदिरा सरकार ने पूरे देश की कोयला खदानों का राष्ट्रीयकरण कर दिया।
- भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) की स्थापना हुई। जिसके अंतर्गत झरिया-रानीगंज कोयला क्षेत्र आता है।
- राष्ट्रीयकरण के बाद परित्यक्त खदानों और “अलाभकारी” हिस्सों में अवैध खनन फलने-फूलने लगा।
- यहीं से कोयला माफियाओं का असली उदय होना शुरू हुआ। यूनियन लीडर, ठेकेदार और राजनेता और गुंडे खदानों पर कब्जा करने लग गए।
बी.पी. सिन्हा, एक ऐसा नाम, जिसे धनबाद का पहला बड़ा कोयला माफिया माना जाता है। गुंडों की आपसी रंजिश और अवैध कोयला कारोबार में वर्चस्व की लड़ाई में 1979 में बी.पी. सिन्हा की हत्या के बाद सूर्यदेव सिंह (सूरजदेव सिंह) ने इस काले कारोबारी साम्राज्य की सत्ता संभाली। वह उत्तर प्रदेश के बलिया से आया था और धनबाद में “ओरिजिनल डॉन” कहलाया। उसने कम समय में ही यूनियन, ट्रांसपोर्ट और अवैध खनन पर पूरा कब्जा जमा लिया।
1980-2000 का दशक_ हिंसा और विस्तार का दौर_
- माफिया गुटों के बीच गैंग वॉर शुरू हुए। 'सिंह' सरनेम वाले गुटों के बीच खूनी संघर्ष चला।
- अवैध कारोबार का तरीका
- परित्यक्त खदानों में रात में खनन।
- आधिकारिक खदानों से चोरी।
- ट्रक/ट्रैक्टर से यूपी, बिहार, पश्चिम बंगाल की मंडियों में तस्करी।
- गरीब “कोयला चुनने वाले” (coal pickers) माफिया के लिए काम करते थे।
- माफियाओं ने यूनियन, ठेका, पुलिस, प्रशासन और राजनीति को अपने कब्जे में ले लिया। धनबाद में “माफिया राज” चलने लगा।
2000 के बाद_ आधुनिक सिंडिकेट और सिस्टम-माफिया गठजोड़_
- अवैध कोयला का सालाना कारोबार हजारों करोड़ का हो गया।
- पुलिस, प्रशासन और कुछ राजनेता कमीशन लेकर माफियाओं को संरक्षण देते थे।
- झरिया में भूमिगत आग (100 साल से जल रही है) का एक कारण अवैध खनन भी है, जिससे घर-जमीन धंस रहे हैं।
- कई हादसों का कारण_ 2022 में 6 मौतें, 2023 में खदान ढहने से मौतें, 2026 में भी हालिया घटनाएं।
वर्तमान स्थिति (2024-2026)_
- धनबाद के निरसा, झरिया, बाघमारा, कतरास क्षेत्रों में 30-40 अवैध साइटें सक्रिय।
- ED, CBI और पुलिस की छापेमारी जारी है, लेकिन माफिया अभी भी सक्रिय।
- नवंबर 2025 में ED ने झारखंड-बंगाल में 40+ जगहों पर छापे मारे, करोड़ों कैश-गोल्ड जब्त किए।
- आरोप_ पुलिस-माफिया और राजनेताओं का सीधा त्रिकोणीय गठजोड़।
अवैध कोयला कारोबार गरीबी, बेरोजगारी, सफेदपोशों की धूर्तता-लालच और सिस्टम की कमजोरी का नतीजा है। एक तरफ गरीब मजदूर रोटी-रोजी के लिए कोयला चुनते हैं, तो दूसरी तरफ कोयला माफिया और सफेदपोश गुंडे अरबों-खरबों का काला धंधा चलाते हैं।
