जल-जंगल-जमीन बचाने का लिया संकल्प
बड़कागांव (गाली बलोदर, गोंदलपुरा, हाए फुलंग)।
स्थानीय रैयतों के बैठक सह धरना स्थल पर आज एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता विकास कुशवाहा ने और संचालन रवि कुमार ने किया।
ग्रामीणों ने एक स्वर में फैसला लिया कि वे किसी भी कंपनी को अपनी जमीन का एक इंच भी नहीं देंगे। जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए वे दृढ़ संकल्पित हैं।
बैठक में फर्जी रैयत बनकर दलाली करने वालों, खासकर BJR, NTPC आदि कंपनियों के लिए काम करने वाले दलालों की घोर निंदा की गई। ग्रामीणों ने ऐसे तत्वों के खिलाफ एकजुट होकर विरोध करने का ऐलान किया।
बैठक में आंदोलन को और अधिक तेज एवं प्रभावी बनाने के लिए विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। रैयतों ने सामूहिक रूप से भूमि संरक्षण के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया।
स्थानीय स्तर पर यह बैठक काफी चर्चित है, क्योंकि ग्रामीणों का यह एकजुट फैसला क्षेत्र के भूमि अधिग्रहण संबंधी विवादों में नया मोड़ ला सकता है।
ग्रामीण भूमि अधिकार कानून
भारत में ग्रामीणों के भूमि अधिकार मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रमुख कानूनों द्वारा संरक्षित हैं। ये कानून भूमि अधिग्रहण, वन अधिकार, आदिवासी/ग्रामीण समुदायों की सुरक्षा और ग्राम सभा की भूमिका पर केंद्रित हैं।
भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 (RFCTLARR Act, 2013)
यह 1894 के पुराने अधिग्रहण कानून की जगह लाया गया प्रमुख कानून है।
मुख्य प्रावधान
- निजी कंपनियों के लिए भूमि अधिग्रहण में 80% प्रभावित भू-स्वामियों की सहमति अनिवार्य।
- PPP परियोजनाओं में 70% सहमति जरूरी।
- ग्रामीण क्षेत्रों में बाजार मूल्य का 4 गुना मुआवजा।
- सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन (Social Impact Assessment) अनिवार्य।
- पुनर्वास, रोजगार और अन्य सुविधाओं का प्रावधान।
- ग्राम सभा/स्थानीय निकायों से परामर्श अनिवार्य।
वन अधिकार अधिनियम, 2006 (Forest Rights Act - FRA)
वन क्षेत्रों में रहने वाले अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पारंपरिक वन निवासियों (OTFD) के अधिकारों को मान्यता देता है।
व्यक्तिगत अधिकार: खेती के लिए अधिकतम 4 हेक्टेयर भूमि पर स्वामित्व (13 दिसंबर 2005 तक कब्जे वाली भूमि)।
सामुदायिक अधिकार: माइनर फॉरेस्ट प्रोड्यूस, चरागाह, जल स्रोत आदि पर अधिकार।
ग्राम सभा की केंद्रीय भूमिका — दावों की सिफारिश, सत्यापन और प्रबंधन।
- अधिकार हस्तांतरणीय नहीं होते (non-transferable)।
- बिना मान्यता के वन भूमि से बेदखली नहीं हो सकती।
पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम, 1996 (PESA Act)
- अनुसूचित क्षेत्रों (Fifth Schedule) में लागू।
- ग्राम सभा को शक्तिशाली बनाता है — भूमि अधिग्रहण, लघु वन उपज, भूमि हस्तांतरण रोकना आदि पर अधिकार।
- भूमि अधिग्रहण से पहले ग्राम सभा से परामर्श अनिवार्य।
- आदिवासी भूमि की सुरक्षा और अवैध हस्तांतरण रोकने का प्रावधान।
अन्य संबंधित कानून/प्रावधान
- संविधान के अनुच्छेद 300A: संपत्ति का अधिकार (कानूनी प्रक्रिया के बिना छीन नहीं जा सकता)।
- राज्य-विशेष कानून (जैसे छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा आदि में अतिरिक्त आदिवासी भूमि सुरक्षा कानून)।
ग्रामीण/रैयत आंदोलन के संदर्भ में कुछ जरूरी बातें_
- ग्राम सभा की सहमति/परामर्श के बिना अधिग्रहण अवैध माना जा सकता है।
- फर्जी रैयत या दलालों द्वारा हेराफेरी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई संभव।
- आंदोलनकारी ग्रामीण FRA, PESA और 2013 Act के प्रावधानों का हवाला देकर अपनी जमीन, जल-जंगल बचाने के लिए संघर्ष कर सकते हैं।
