साहित्य के क्षेत्र में कवि एवं शिक्षाविद् के रूप में शिव मंगल सिंह 'सुमन' की पहचान एक तत्कालीन अगुआ की रही है। आज के दौर में भी उनकी कविता जहां एक ओर युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय रही है वहीं तब के सामुहिक चेतना के संरक्षक भी रहे थे। अपनी कविताओं व रचनाओं के माध्यम से उन्होंने न केवल अपनी भावनाओं के दर्द को लोगों के सामने रखा बल्कि उस समय के मुद्दों पर अपनी निर्भिक टिप्पणियां भी कीं। अपनी उन्हीं कालजयी रचनाओं में से एक 'वरदान माँगूंगा नहीं'....
