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कनहरी पहाड़ को मिला जैव विविधता धरोहर स्थल का दर्जासंरक्षण के लिए लोगों से सहयोग की अपील
हजारीबाग। शहर के प्रसिद्ध कनहरी पहाड़ क्षेत्र को जैव विविधता धरोहर स्थल (Biodiversity Heritage Site - BHS) घोषित कर दिया गया है। यह घोषणा जैव विविधता (संशोधन) अधिनियम, 2023 की धारा 37(1) के अंतर्गत वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, झारखंड सरकार द्वारा की गई है।
हजारीबाग पूर्व वन प्रमंडल की देखरेख में अब इस क्षेत्र के संरक्षण और संवर्धन का कार्य किया जाएगा।
वन विभाग के अनुसार, कनहरी पहाड़ अपनी प्राकृतिक सुंदरता, दुर्लभ वनस्पतियों, जीव-जंतुओं और पर्यावरणीय महत्व के कारण विशेष रूप से जाना जाता है। इसे धरोहर स्थल का दर्जा मिलने से क्षेत्र की जैव विविधता को कानूनी संरक्षण मिलेगा और इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सकेगा।
“कैनरी पहाड़ अपनी प्राकृतिक सुंदरता, दुर्लभ वनस्पतियों, जीव-जंतुओं एवं पर्यावरणीय महत्व के लिए जाना जाता है। विभाग ने आम लोगों से अपील की है कि वे इस धरोहर स्थल की जैव विविधता को सुरक्षित रखने में सहयोग करें तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएं।”
_विश्वनाथ शाह, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) सह जैव विविधता बोर्ड के चेयरमैन
विभाग का कहना है कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना और प्राकृतिक संपदा को भावी पीढ़ी के लिए संरक्षित करना है।
कैनरी पहाड़ क्षेत्र में अवैध कटाई, अतिक्रमण, प्रदूषण या किसी भी प्रकार की हानिकारक गतिविधि को सख्ती से रोका जाएगा। स्थानीय नागरिकों, पर्यटकों और पर्यावरण प्रेमियों से अपील की गई है कि वे इस संरक्षित क्षेत्र की सुरक्षा में सक्रिय भूमिका निभाएं।
जैव विविधता धरोहर स्थल (Biodiversity Heritage Site - BHS) क्या है ?
जैव विविधता धरोहर स्थल भारत में जैव विविधता अधिनियम, 2002 (Biological Diversity Act, 2002) की धारा 37 के तहत घोषित किए जाने वाले विशेष क्षेत्र हैं। इनका उद्देश्य उन इलाकों को कानूनी संरक्षण प्रदान करना है जो जैव विविधता की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण, अनोखे और संवेदनशील हैं।
खास विशेषताएँ
ये क्षेत्र आमतौर पर अद्वितीय और पारिस्थितिक रूप से नाजुक (ecologically fragile) होते हैं।
- वन्य तथा पालतू/कृषि संबंधी प्रजातियों की उच्च समृद्धि
- उच्च स्थानीयता (High Endemism) — यानी ऐसी प्रजातियाँ जो केवल उसी क्षेत्र में पाई जाती हैं
- दुर्लभ, लुप्तप्राय और कीस्टोन प्रजातियाँ
- विकासात्मक महत्व वाली प्रजातियाँ
- घरेलू प्रजातियों के जंगली पूर्वज
- जीवाश्म (Fossil beds) वाले क्षेत्र
- सांस्कृतिक, नैतिक या सौंदर्यिक महत्व
- लंबे समय से मानव और प्रकृति का सह-अस्तित्व
ये क्षेत्र स्थलीय (जंगलों, पहाड़ों), जलीय, तटीय या समुद्री भी हो सकते हैं।
कानूनी प्रावधान
- राज्य सरकार स्थानीय निकायों (Local Bodies) और राज्य जैव विविधता बोर्ड की सलाह से आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन के माध्यम से किसी क्षेत्र को BHS घोषित कर सकती है।
- घोषणा के बाद उस क्षेत्र का संरक्षण और प्रबंधन राज्य सरकार तथा संबंधित वन विभाग की देखरेख में होता है।
- राज्य सरकार प्रभावित लोगों के लिए मुआवजा या पुनर्वास की योजनाएँ भी बना सकती है।
क्या महत्व है ?
- इन स्थलों को घोषित करने से वहाँ अवैध कटाई, अतिक्रमण, खनन या अन्य हानिकारक गतिविधियों पर कानूनी रोक लगती है।
- आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने में मदद मिलती है।
- पर्यावरण संतुलन, पर्यटन (इको-टूरिज्म) और स्थानीय समुदायों की आजीविका को भी बढ़ावा मिलता है।
कनहरी पहाड़ (हजारीबाग, झारखंड) को हाल ही में इसी श्रेणी में घोषित किया गया है। भारत में अब तक कई राज्यों में कुल 40+ BHS घोषित हो चुके हैं।
हालांकि BHS राष्ट्रीय उद्यान या अभयारण्य की तरह संरक्षित क्षेत्र नहीं है, बल्कि स्थानीय स्तर पर जैव विविधता संरक्षण का एक लोकतांत्रिक और समावेशी तरीका है, जिसमें स्थानीय लोगों की भागीदारी को महत्व दिया जाता है।
कनहरी पहाड़ की प्रमुख प्रजातियाँ
कनहरी पहाड़ (हजारीबाग, झारखंड) को जैव विविधता धरोहर स्थल घोषित किए जाने के बाद इसकी समृद्ध जैव विविधता को खास महत्व मिला है। यह क्षेत्र मुख्य रूप से साल (Shorea robusta) के घने जंगलों से घिरा हुआ है।
प्रमुख वनस्पतियाँ (Flora)
- साल (Shorea robusta)— क्षेत्र का प्रमुख वृक्ष
- अर्जुन (Terminalia arjuna)
- छतवन
- रामदूत वन
- मुसली
- सतवार
- बंदरलोरी
- बुचनानिया लान्जन (Buchanania lanzan)
- स्टर्कुलिया यूरेन्स (Sterculia urens)
- अन्य औषधीय पौधे और मिश्रित पर्णपाती वनस्पतियाँ
प्रमुख जीव-जंतु (Fauna)
स्तनधारी (Mammals):
- जंगली सूअर (Wild Boar)
- जंगली खरगोश (Hare)
- नेवला (Mongoose)
- बज्रकीट (Pangolin — संरक्षित प्रजाति)
- साहिल (Sloth Bear — संभावित)
- बंदर और लंगूर
सरीसृप (Reptiles):
- अजगर (Python)
- अन्य साँप (Cobra, Krait आदि)
पक्षी (Birds):
- विभिन्न प्रकार के पक्षी (Bee-eater, Barbets, Flowerpeckers, Drongos, Woodpeckers आदि)
-क्षेत्र में कैनरी पक्षी की उपस्थिति के कारण इसका नाम कनहरी/कैनरी पड़ा माना जाता है।
कनहरी पहाड़ हजारीबाग वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी के निकट है, इसलिए आसपास की जैव विविधता (चीतल, सांभर, भालू, पक्षी आदि) का प्रभाव भी यहाँ दिखता है।
पर यह क्षेत्र दुर्लभ औषधीय पौधों और स्थानीय जैव विविधता के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है। संरक्षण के बाद अवैध कटाई, शिकार और अतिक्रमण पर सख्त नजर रखी जा रही है।
