दर्दनाक सड़क हादसे में दुकानदार की मौत ! प्रशासन और DTO जिम्मेदार ?

दर्दनाक सड़क हादसे में दुकानदार की मौत ! प्रशासन और DTO जिम्मेदार ?

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दर्दनाक सड़क हादसे में दुकानदार की मौत
जिला प्रशासन और धनबाद DTO जिम्मेदार ?
झरिया। लोको बाजार के पास मंगलवार सुबह हुए दर्दनाक सड़क हादसे में पूजा दुकान संचालक 48 वर्षीय रंजीत दे की मौत हो गई। हादसे के बाद आक्रोशित स्थानीय लोगों ने सड़क जाम कर दिया और जिला प्रशासन तथा धनबाद DTO की घोर लापरवाही को जिम्मेदार ठहराते हुए तीखा विरोध प्रदर्शन किया।

घटना सुबह करीब 10 बजे की है। कंद्रा बाजार निवासी रंजीत दे अपनी बाइक (JH10AU 2839) से कंद्रा की ओर से झरिया आ रहे थे। इसी दौरान पीछे से तेज रफ्तार में आ रहे 10 चक्के वाले हाइवा (JH16E 3281) ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी और रौंदते हुए ऊपर चढ़ गया। टक्कर इतनी भीषण थी कि रंजीत दे की मौके पर ही मौत हो गई।

जिला प्रशासन और DTO को ठहराया जिम्मेदार
हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने सड़क जाम कर दिया और जिला प्रशासन व धनबाद DTO पर सीधा आरोप लगाया कि उनकी लगातार लापरवाही के कारण इस मार्ग पर बार-बार दुर्घटनाएं हो रही हैं। लोगों ने कहा कि महज दो दिन पहले भी इसी सड़क पर एक हादसा हो चुका था, फिर भी जिला प्रशासन और DTO ने सुरक्षा के कोई ठोस इंतजाम नहीं किए। न स्पीड ब्रेकर लगाए गए, न कैमरे लगाए गए और न ही ओवरस्पीडिंग वाले भारी वाहनों पर कोई अंकुश लगाया गया।

निवासियों का कहना है कि जिला प्रशासन और DTO की उदासीनता ही इस हादसे की असली वजह है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तुरंत इस मार्ग पर यातायात सुरक्षा के प्रभावी उपाय नहीं किए गए तो आगे भी ऐसी घटनाएं होती रहेंगी।

इलाके में शोक की लहर
रंजीत दे कंद्रा बाजार में पूजा सामग्री की प्रतिष्ठित दुकान चलाते थे। उनकी मौत की खबर मिलते ही पूरे इलाके में शोक व्याप्त हो गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

सुदामडीह थाना पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और हादसे में शामिल हाइवा को जब्त कर लिया गया है। चालक की तलाश की जा रही है।

स्थानीय लोगों की मांग
- लोको बाजार-झरिया मार्ग पर तत्काल स्पीड ब्रेकर, साइन बोर्ड और निगरानी कैमरे लगाए जाएं।
- भारी वाहनों की रफ्तार पर सख्त अंकुश लगाया जाए।
- जिला प्रशासन और DTO को इस हादसे की जिम्मेदारी लेते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।

जाहिर है इस घटना के बाद से जिला प्रशासन और DTO पर अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कब तक आम नागरिकों की जान की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

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