समय से पहले झमाझम बारिश की दस्तक !
दक्षिण-पश्चिम मानसून के समय से पहले आगमन की संभावना, IMD ने दी जानकारीनई दिल्ली। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने कहा है कि इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून के समय से पहले (early arrival) आने की संभावना है। विभाग के अनुसार, दक्षिण बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के कुछ हिस्सों में इस सप्ताह के अंत तक मानसून के आगमन के लिए परिस्थितियां अनुकूल बन रही हैं।
IMD की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, इस सप्ताह के अंत (14-17 मई के आसपास) तक इन क्षेत्रों में मानसून के प्रवेश की संभावना है। सामान्य रूप से अंडमान सागर में मानसून 20 मई के आसपास पहुंचता है, इसलिए इस बार इसमें थोड़ी जल्दबाजी देखी जा सकती है।
IMD के अनुसार दक्षिण बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है, जिससे जुड़ी चक्रवाती परिस्थिति 4.5 किमी तक ऊपर तक फैली हुई है।
अगले 48 घंटों में यह क्षेत्र और अधिक सक्रिय होने की संभावना है, जो मानसून की उत्तरी दिशा में प्रगति को बढ़ावा देगी।
IMD के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय मोहापात्रा ने भी परिस्थितियों को अनुकूल बताते हुए पुष्टि की है।
मानसून के अंडमान-निकोबार पहुंचने के बाद यह धीरे-धीरे मुख्य भूमि की ओर बढ़ेगा। केरल में सामान्य तारीख 1 जून है, हालांकि कुछ पूर्वानुमान समय से पहले (late May) पहुंचने की ओर इशारा कर रहे हैं।
हालांकि पूरे देश में मानसून की कुल बारिश इस वर्ष सामान्य से कम (below normal) रहने का पूर्वानुमान है (लगभग 92% of Long Period Average)। IMD ने किसानों और संबंधित विभागों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
निम्न दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Area या LPA) क्या है ?
निम्न दबाव का क्षेत्र वह जगह है जहाँ हवा का दबाव आसपास के इलाकों की तुलना में कम होता है।
क्यों बनता है और क्या होता है ?
जब कोई जगह गर्म हो जाती है, तो वहाँ की हवा हल्की होकर ऊपर उठने लगती है।
ऊपर उठती हवा की जगह भरने के लिए चारों तरफ से ठंडी और भारी हवा उस क्षेत्र की ओर बहने लगती है। इसे अभिसरण (Convergence) कहते हैं।
ऊपर उठती हवा ठंडी होती है, जिसमें नमी संघनित (condense) होकर बादल बनते हैं और बारिश होती है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून के आने के लिए बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव का क्षेत्र बनना बहुत जरूरी है।
यह क्षेत्र जितना गहरा और सक्रिय होता है, मानसून उतनी तेजी से उत्तर की ओर बढ़ता है।
IMD ने हाल ही में कहा है कि दक्षिण बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक निम्न दबाव का क्षेत्र बन रहा है, जो इस सप्ताह के अंत तक और मजबूत होने वाला है। यही कारण है कि मानसून समय से पहले अंडमान-निकोबार पहुंच सकता है।
निम्न दबाव और मानसून का संबंध
बहुत ही महत्वपूर्ण लेकिन सीधा है। मानसून को आगे बढ़ाने में निम्न दबाव का क्षेत्र मुख्य "इंजन" का काम करता है।
मानसून कैसे आता है ?
भारत में गर्मियों में भूमि (उत्तर भारत) तेजी से गर्म हो जाती है, जबकि समुद्र (भारतीय महासागर) अपेक्षाकृत ठंडा रहता है।
→ भूमि के ऊपर निम्न दबाव (Low Pressure) बनता है।
→ समुद्र के ऊपर उच्च दबाव (High Pressure) रहता है।
हवा हमेशा उच्च दबाव से निम्न दबाव की ओर बहती है। इसलिए दक्षिण-पश्चिम दिशा से नम हवा (moist winds) भारत की ओर खिंचकर आती है — यही दक्षिण-पश्चिम मानसून है।
निम्न दबाव क्षेत्र (LPA) की भूमिका
_ बंगाल की खाड़ी में जब निम्न दबाव का क्षेत्र बनता है, तो यह मानसून की नम हवा को और तेजी से खींचता है।
_ यह क्षेत्र हवा को घुमावदार बनाता है (cyclonic circulation), जिससे सघन नमी वाले बादल बनते हैं।
_ निम्न दबाव जितना मजबूत और सक्रिय होता है, मानसून उतनी तेजी और उत्तर की ओर बढ़ता है।
- ये निम्न दबाव क्षेत्र मानसून की "स्टेपिंग स्टोन" की तरह काम करते हैं। एक के बाद दूसरा बनता है और मानसून को केरल → कर्नाटक → महाराष्ट्र → उत्तर भारत की ओर ले जाता है।
IMD ने जो बताया है कि दक्षिण बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव बन रहा है, उसी के कारण मानसून इस बार समय से पहले अंडमान-निकोबार पहुंचने वाला है। अगर यह क्षेत्र और गहरा हुआ तो मानसून मुख्य भूमि (केरल) पर भी जल्दी पहुंच सकता है।
निम्न दबाव क्षेत्र मानसून की नम हवा को भारत की ओर खींचने का मुख्य आकर्षण केंद्र होता है। जितने ज्यादा और जितने मजबूत निम्न दबाव बनेंगे, मानसून उतना ही सक्रिय और अच्छा रहेगा।
