PM मोदी ने घटाया काफिले का आकार, विपक्ष ने बताया प्रचार का स्टंट

PM मोदी ने घटाया काफिले का आकार, विपक्ष ने बताया प्रचार का स्टंट

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PM मोदी ने घटाया काफिले का आकार
विपक्ष ने बताया प्रचार का स्टंट 
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल के घरेलू दौरों के दौरान अपने काफिले का आकार काफी कम कर दिया है। हालांकि SPG प्रोटोकॉल के तहत जरूरी सभी सुरक्षा व्यवस्थाएं बरकरार रखी गई हैं। सरकार का कहना है कि यह कदम पश्चिम एशिया संकट के बीच आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रधानमंत्री की हाल ही आई सात अपीलों के अनुरूप है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, छोटे काफिले से ईंधन की बचत हो रही है, यातायात पर बोझ कम पड़ रहा है और ‘मिशन लाइफ’ अभियान को मजबूती मिल रही है। प्रधानमंत्री खुद उदाहरण पेश कर राष्ट्र को आत्मनिर्भरता और स्थायी जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

विपक्ष की आलोचना
हालांकि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस कदम को “प्रचार का स्टंट ” बताया है।  
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, “जब देश महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक संकट से जूझ रहा है, तब पीएम का काफिला छोटा करना महज दिखावा है। असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश है। अगर ईंधन बचत करनी है तो सरकारी कार्यक्रमों में व्यर्थ खर्च और अनावश्यक विदेशी दौरों पर लगाम लगाएं।”
कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने X पर लिखा, “SPG सुरक्षा में कोई कमी नहीं, यह दावा किया जा रहा है। लेकिन सवाल यह है कि क्या जनता को भी इस ‘बचत’ का लाभ मिल रहा है? या फिर यह सिर्फ कैमरे के लिए है? पहले पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छू रहे थे, अब काफिले की तस्वीरें वायरल करके पर्यावरण प्रेमी बनने की कोशिश।”

विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि यह बदलाव चुनावी प्रबंधन का हिस्सा है और असल में केंद्र सरकार की नीतियों के कारण देश ऊर्जा संकट और बढ़ते आयात बिल की समस्या से जूझ रहा है। कुछ नेताओं ने पूछा कि क्या इसी तरह सभी मंत्रियों और अधिकारियों के काफिलों का भी आकार कम किया गया है या सिर्फ पीएम का?

सरकार का बचाव 
पीएमओ सूत्रों ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री का यह कदम प्रतीकात्मक नहीं बल्कि व्यावहारिक है। सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया गया है और यह बदलाव पूरे देश को छोटे-छोटे योगदानों के महत्व का संदेश दे रहा है।

यह पहल ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है, हालांकि विपक्ष इसे राजनीतिक दिखावा करार दे रहा है।


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