नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने स्व. माधवलाल सिंह को दी श्रद्धांजलि

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने स्व. माधवलाल सिंह को दी श्रद्धांजलि

Village LINE
0
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और पूर्व सांसद रविंद्र पांडेय ने स्व. माधवलाल सिंह को दी श्रद्धांजलि
साड़म (गिरिडीह)। झारखंड के पूर्व मंत्री स्वर्गीय माधवलाल सिंह के आकस्मिक निधन पर शोक व्यक्त करने के लिए नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और गिरिडीह के पूर्व सांसद रविंद्र कुमार पांडेय सोमवार को साड़म पहुंचे।
दोनों नेताओं ने स्व. माधवलाल सिंह की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित की और शोक संतप्त परिवार के सदस्यों से मुलाकात कर ढाढस बंधाया।
इस अवसर पर बाबूलाल मरांडी ने कहा कि माधव बाबू गरीबों के दिलों में बसने वाले ईमानदार नेता थे। उन्होंने सदन में हमेशा दीन-दुखियों की समस्याएं उठाईं। उनका इस तरह अचानक चले जाना पूरे राज्य के लिए दुखद है। उनकी कमी लंबे समय तक खलेगी।

पूर्व सांसद रविंद्र कुमार पांडेय ने भी स्व. माधवलाल सिंह की सादगी, ईमानदारी और जनसेवा भावना को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
  
"गरीबों के दिलों में बसने वाले माधव बाबू की छवि एक ईमानदार नेता के रूप में रही थी। वे दीन-दुखियों की बातें हमेशा सदन में उठाते रहते थे। उनका इस तरह से चले जाना सभी के लिए दुखदाई है। उनकी कमी हमेशा खलेगी।"
_बाबूलाल मरांडी, नेता प्रतिपक्ष, झारखंड

स्व. माधवलाल सिंह लंबे समय तक झारखंड राजनीति में सक्रिय रहे और जनहित के मुद्दों पर अपनी मजबूत आवाज रखते थे।

माधवलाल सिंह की राजनीतिक यात्रा
स्व. माधवलाल सिंह (जिन्हें माधव बाबू के नाम से भी जाना जाता था) झारखंड (तत्कालीन बिहार) की राजनीति के एक प्रमुख और जनप्रिय चेहरे थे। वे गोमिया विधानसभा क्षेत्र से चार बार विधायक रहे और बिहार तथा झारखंड दोनों राज्यों में मंत्री के पद पर रह चुके थे। सादगी, ईमानदारी और गरीबों-दीन-दुखियों की सेवा के लिए वे “झारखंड की राजनीति के संत” के रूप में प्रसिद्ध थे।

राजनीतिक शुरुआत और चुनावी सफर
- 1985: गोमिया विधानसभा से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में पहली बार चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। यह उनकी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत थी।
- 1990: एक बार फिर निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ा और भाजपा के मजबूत उम्मीदवार छत्रुराम महतो को मात्र 527 वोटों से हराकर लगातार दूसरी बार विधायक बने।
- 2000: गोमिया से तीसरी बार निर्दलीय विधायक चुने गए। इस दौरान वे एकीकृत बिहार सरकार में श्रम एवं पर्यटन मंत्री बने।
- 2009: झारखंड राज्य गठन के बाद कांग्रेस के टिकट पर गोमिया से चौथी बार विधायक निर्वाचित हुए। इस बार वे झारखंड सरकार में परिवहन एवं नागरिक उड्डयन मंत्री रहे।

हालांकि 2014 में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े लेकिन हार गए।  
2019 में एक बार फिर स्वतंत्र प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा।

मंत्री पद और योगदान
- बिहार सरकार (2000) में श्रम एवं पर्यटन मंत्री।
- झारखंड सरकार (2003 के आसपास) में परिवहन एवं नागरिक उड्डयन मंत्री।
- इसके अलावा उन्होंने झारखंड राज्य धार्मिक ट्रस्ट बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में भी सेवा की।

वे सदन में हमेशा गरीबों, किसानों और क्षेत्रीय मुद्दों की आवाज बनकर उभरे। राजनीतिक मर्यादा, सामाजिक सद्भाव और जनकल्याण को उन्होंने हमेशा प्राथमिकता दी।

व्यक्तिगत छवि
माधवलाल सिंह सत्ता के बावजूद बेहद साधारण जीवन जीते रहे। उन्होंने सरकारी बंगला या सुरक्षा गार्ड लेने से हमेशा इनकार किया। गांव-कस्बों की चौपालों और आम लोगों के बीच उनकी गहरी पैठ थी। यही कारण था कि गोमिया-बेरमो क्षेत्र में वे लंबे समय तक प्रभावशाली नेता बने रहे।

निधन: 13 मई 2026 को रांची के एक निजी अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद उनका निधन हो गया। उनके निधन पर पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई और अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ साड़म (बोकारो) में किया गया।

माधवलाल सिंह की राजनीतिक यात्रा गरीबी, सादगी और जनसेवा से शुरू होकर लंबे संघर्ष और मंत्री पद तक पहुंची — जो झारखंड की ग्रामीण राजनीति का एक प्रेरणादायक उदाहरण है।

एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Ok, Go it!
To Top