बड़कागांव पूर्वी क्षेत्र के हजारों रैयतों ने समाहरणालय घेरा
हजारीबाग | कोयला खदान आवंटन के विरोध में शुक्रवार को हजारीबाग समाहरणालय के सामने बड़े पैमाने पर जनआक्रोश महारैली और धरना प्रदर्शन हुआ।
कर्णपुरा बचाव संघर्ष समिति के आह्वान पर बड़कागांव क्षेत्र के हजारों किसानों, ग्रामीणों और संभावित विस्थापितों ने समाहरणालय को घेर लिया। प्रदर्शनकारियों ने जल, जंगल, जमीन और अपनी आजीविका बचाने की जोरदार मांग रखी।
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने गोंदलपुरा, बादम, मोइत्रा और बाबुपारा कोल ब्लॉकों में अदानी, एनटीपीसी, जेएसडब्ल्यू, एनएमडीसी और रुंगटा जैसी कंपनियों को दिए गए खदान आवंटनों का जमकर विरोध किया।
आयोजकों का कहना है कि इन खदानों के कारण हजारों परिवारों की खेती-किसानी छिन जाएगी, भूजल प्रभावित होगा, जंगल नष्ट होंगे और बड़े पैमाने पर विस्थापन होगा। प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाते हुए कहा-
“जनता की हुंकार नहीं चलेगा अन्याचार!”
“खेती बचाओ, गांव बचाओ!”
“कोयला कंपनियों की मनमानी बंद करो!”
आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि बड़कागांव पश्चिमी क्षेत्र की खनन से हुई भारी तबाही और विस्थापन को देखते हुए वे पूर्वी क्षेत्र का ऐसा हाल नहीं होने देंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन और कंपनियां उनकी आजीविका और पहचान पर सीधा हमला कर रही हैं।
कंपनियां जिस जमीन को खनन के लिए हड़पने की फिराक में हैं, वो जमीन बहु-फसली और उपजाऊ है। यहां सालभर धान, गेहूं, दलहन, गन्ने और ढेर सारी सब्जियां उगाई जाती हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कर्णपुरा बचाव संघर्ष समिति ने प्रशासन के समक्ष अपनी मांगें रखीं।
- सभी चारों कोल ब्लॉकों का आवंटन तुरंत रद्द किया जाए।
- किसानों और ग्रामीणों की जमीन, जल और जंगल की रक्षा की जाए।
- कोयला कंपनियों को कोई भी खदान देने से पहले स्थानीय लोगों की सहमति अनिवार्य हो।
समिति के संयोजकों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
आज सुबह 9 बजे से शुरू हुए इस एक दिवसीय धरना प्रदर्शन में बड़कागांव पूर्वी क्षेत्र के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में लोग पारंपरिक हथियारों और तख्तियां लेकर पहुंचे। बैलगाड़ियों, अन्य वाहनों से और पैदल प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे किसानों ने अपनी उपस्थिति से बड़कागांव पूर्वी क्षेत्र की चिंताओं को सरकार के सामने रखा।
झारखंड के हजारीबाग जिले में कोयला खनन के नाम पर लगातार हो रहे आवंटनों और आवंटी कोल कंपनियों द्वारा जमीनों के बेजा अधिग्रहण की कोशिशों के कारण स्थानीय रैयतों व किसानों में गुस्सा बढ़ता जा रहा है।
फिलहाल आज के जनाक्रोश और विरोध प्रदर्शन ने एकबार फिर कोल कंपनियों, पुलिस और प्रशासन की नींदे उड़ा दी हैं और उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया है।
