CJI सूर्य कांत ने गठित की हाई-पावर समिति
नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्य कांत ने देशभर के अदालतों के आधुनिकीकरण और बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति गठित करने की घोषणा की है। इस समिति का नेतृत्व सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार करेंगे।
समिति को देशव्यापी अदालतों के आधुनिकीकरण का विस्तृत खाका तैयार करने और इसके लिए 40,000 से 50,000 करोड़ रुपये की सरकारी फंडिंग सुनिश्चित करने का कार्य सौंपा गया है।
समिति की जिम्मेदारियां
समिति को 31 अगस्त 2026 तक प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (PM-EAC) के सदस्य संजीव सान्याल को अपनी विस्तृत रिपोर्ट और फंडिंग आवश्यकताएं सौंपनी हैं।
यह ‘Judicial Infrastructure Advisory Committee’ नामक समिति न्यायिक बुनियादी ढांचे की व्यापक समीक्षा करेगी। इसमें सिस्टमिक बाधाओं की पहचान, मुकदमेबाजों और वकीलों के लिए बेहतर सुविधाएं, डिजिटल आधुनिकीकरण, भौतिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकास आदि प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं।
समिति के अन्य सदस्यों में कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस देबांगशु बासक, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा, बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस सोमशेखर सुंदरेशन और केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) के महानिदेशक शामिल हैं।
जब CJI सूर्य कांत, नवंबर 2025 में 53वें मुख्य न्यायाधीश बने, तभी से वे न्यायिक सुधारों और आधुनिकीकरण पर लगातार जोर दे रहे हैं। उन्होंने पहले भी प्रौद्योगिकी के माध्यम से न्याय व्यवस्था को मजबूत करने, राष्ट्रीय न्यायिक नीति और अदालतों की दक्षता बढ़ाने पर बल दिया है। यह समिति उनके विजन का हिस्सा मानी जा रही है, जिसका उद्देश्य न्याय वितरण प्रणाली को अधिक तेज, सुलभ और नागरिक-केंद्रित बनाना है।
उम्मीद है कि यह कदम लंबे समय से चली आ रही अदालतों में लंबित मामलों, पुरानी इंफ्रास्ट्रक्चर और संसाधनों की कमी की चुनौतियों को दूर करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
