प्रशासन की उदासीनता पर सवाल
लातेहार । नगर पंचायत के करकट गांव की मांगोया देवी पिछले पाँच महीनों से वृद्धा पेंशन के लिए भटक रही हैं। स्वर्गीय पति के बाद अब वे अपनी बेटी बुधनी देवी के सहारे जीवन यापन कर रही हैं। परिवार में न कोई बेटा है, न दामाद। बेटी खुद विधवा है। ऐसे में पेंशन ही उनका एकमात्र सहारा है, लेकिन सरकारी व्यवस्था ने उन्हें बेहद ही निराश कर दिया है।
मांगोया देवी बताती हैं कि बैंक में पेंशन की राशि आ चुकी है, फिर भी उन्हें भुगतान नहीं मिल रहा। बड़ोदरा बैंक (Bank of Baroda) के चक्कर लगाते-लगाते वे थक चुकी हैं। हर बार अधिकारी नए-नए बहाने बनाते हैं। गांव से लातेहार तक आने-जाने में हर बार 40-50 रुपये का खर्च हो जाता है, जो उनकी गरीबी के हिसाब से बहुत बड़ा बोझ है।
“पेंशन ही तो हमारा एक सहारा है। बिना इसके कैसे गुजारा होगा?” – _मांगोया देवी
यह मामला सिर्फ एक वृद्धा की पीड़ा नहीं, बल्कि पूरे जिला प्रशासन की उदासीनता को उजागर करता है। गरीबों और असहायों के लिए बनी योजनाएं कागजों तक ही सिमटकर रह गई हैं। पदाधिकारियों को गाड़ी-घोड़ा, सुख-सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन लाचार वृद्ध नागरिकों के लिए कोई ठोस उपाय नहीं है।
वर्तमान में देश में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है, लेकिन अगर जिला प्रशासन वृद्धाओं के लिए भी इतनी ही ईमानदारी और संवेदनशीलता दिखाता, तो मांगोया देवी जैसी महिलाओं को इस नौबत का सामना न करना पड़ता।
Village LINE live इस मामले की लगातार निगरानी कर रहा है। संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा जा रहा है कि आखिर पेंशन राशि बैंक में आने के बावजूद वृद्धा को भुगतान क्यों रोका जा रहा है? क्या गरीबों को सम्मानपूर्वक जीने का अधिकार नहीं है?
