पलामू । चैनपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत पनेरीबांध गांव में सोमवार की देर रात भीषण आग लग गई। आग की चपेट में आकर दिलीप पाठक का खपड़ापोस मकान पूरी तरह जलकर खाक हो गया।
पीड़ित परिवार के अनुसार, घर के अंदर रखी 50 हजार रुपये की नगद राशि और लगभग आठ लाख रुपये कीमत की घरेलू संपत्ति, बर्तन-भांडे, कपड़े व अन्य सामान जलकर राख हो गया। कुल नुकसान 8.5 लाख रुपये से अधिक का आंका जा रहा है।
घटना की सूचना मिलते ही आस-पास के ग्रामीणों की भीड़ मौके पर जुट गई। लोगों ने अपने स्तर पर आग बुझाने का प्रयास शुरू किया। बाद में अग्निशमन विभाग की टीम पहुंची और ग्रामीणों के सहयोग से करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका।
जब तक आग बुझाई जा सकी, तब तक मकान का सारा सामान जल चुका था। पीड़ित परिवार इस समय गहरी सदमा और आर्थिक संकट में है।
अभी तक आग लगने का सही कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है। प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट या चूल्हे से आग लगने की संभावना जताई जा रही है। चैनपुर थाना पुलिस ने घटना का संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी है।
पीड़ित ने प्रशासन से तुरंत मदद की मांग की है। उन्होंने कहा, “सब कुछ जल गया। अब घर बसाने और दोबारा खड़ा होने में बहुत मुश्किल होगी। सरकार और प्रशासन से उचित मुआवजे की उम्मीद है।”
स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी पीड़ित परिवार से मिलकर हालात का जायजा लिया है और मदद का आश्वासन दिया है।
आगलगी की घटनाओं से कैसे बचें –आग लगने की सबसे बड़ी वजह होती है लापरवाही। चैनपुर की घटना में भी आग का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं है, लेकिन ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में शॉर्ट सर्किट, चूल्हा-गैस या धुआं-चिंगारी से आग फैलती है। कुछ जरूरी ऐहतियातन उपाय अपनाकर आप 80-90% आग की घटनाओं को रोक सकते हैं:
बिजली संबंधी सावधानियां (सबसे आम कारण)
- पुरानी वायरिंग तुरंत बदलवाएं। खपड़ापोस या कच्चे मकानों में PVC वायरिंग जरूर लगवाएं।
- एक सॉकेट पर कई उपकरण न जोड़ें (ओवरलोडिंग से बचें)।
- घर में MCB (मिनिएचर सर्किट ब्रेकर) और ELCB लगवाएं।
- सोने से पहले सभी स्विच ऑफ कर दें। रात में मोबाइल चार्जिंग छोड़कर न सोएं।
- बिजली का काम लाइसेंसधारी इलेक्ट्रीशियन से ही करवाएं।
रसोई और चूल्हा करने के दौरान
- चूल्हा/गैस चूल्हा जलाते समय कभी भी अकेला न छोड़ें।
- गैस सिलेंडर को घर के अंदर रखने की बजाय बाहर शेड में रखें।
- रसोई में लकड़ी, कोयला या घास-फूस को चूल्हे से दूर रखें।
- तेल-घी या पेट्रोल जैसी चीजें आग से कम से कम 2 मीटर दूर रखें।
- रात में चूल्हा पूरी तरह ठंडा होने के बाद ही छोड़ें।
घरेलू सामान और भंडारण में सावधानी
- नकद राशि, जरूरी दस्तावेज और आभूषण फायरप्रूफ अलमारी या बैंक लॉकर में रखें (जैसा कि पीड़ित के घर में 50 हजार नगद जल गया)।
- खपड़ापोस या छप्पर वाले मकानों में सूखी घास, भूसा या प्लास्टिक का ढेर न लगाएं।
- बच्चों को आग, माचिस या लाइटर से दूर रखें।
आग बुझाने का उपकरण जरूर रखें
- फायर एक्सटिंग्विशर (ABC प्रकार) – 5 किलो वाला 800-1200 रुपये में उपलब्ध।
- बाल्टी, रेत, पानी का भंडार और मोटा कम्बल (आग बुझाने के लिए)।
- स्मोक डिटेक्टर (धुआं अलार्म) – 300-500 रुपये में मिल जाता है, बैटरी वाला।
- फोन पर फायर ब्रिगेड नंबर सेव रखें: 101 या 112 (इमरजेंसी)।
समुदाय और गांव स्तर पर उपाय
- गांव में फायर फाइटिंग टीम बनाएं और ग्रामीणों को ट्रेनिंग दिलवाएं।
- अग्निशमन विभाग से संपर्क कर मॉक ड्रिल करवाएं।
- खपड़ापोस मकानों में छप्पर पर मिट्टी या फायर रिटार्डेंट पेंट लगवाएं (कम खर्च में उपलब्ध)।
- बिजली विभाग से पुरानी ट्रांसफार्मर और लाइन की नियमित जांच करवाएं।
हादसे में पीड़ित परिवार के लिए सलाह:
प्रभावित परिवार जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी, चैनपुर थाना और स्थानीय विधायक/सांसद से संपर्क करें। झारखंड सरकार के आपदा राहत फंड से मुआवजा मिल सकता है।
इन छोटी-छोटी सावधानियों से आपका घर, परिवार और सारी संपत्ति सुरक्षित रह सकती है।
आग लगने पर सबसे पहले परिवार को बाहर निकालें, फिर 101 पर कॉल करें।
